Teri-Meri Aashiqui। तेरी – मेरी आशिकी। Part – 01। हिंदी कहानी

Author - Avinash Kumar

हमारी आंखें भी अक्सर उसी के ख्वाब  देखते है, जिसे पाना हमारी हाथों के लकीरों में नहीं होती है। मगर इन आंखों को कहां पता होती है कि हमारी भूल की वजह से दिल को सारी उम्र तड़पना पड़ता है। 

कॉलेज का पहला दिन मुझे आज भी याद है जब मेरी आँखें उसे पहली बार देखी थी। एक ऐसा  पल, जिस पल को याद कर,  मैं जिंदगी के हर पल को जी रहा हूं।

मैं कॉलेज की कोरिडोर से अपने क्लास रूम के अंदर जा रहा था।  मन में एक अलग सी उमंग थी । सारी दुनिया को जीत लेने की , सारी दुनिया को समझ लेने की , एक अलग पहचान बनाने का। मगर  वह पहचान कैसा होगा यह तो उस वक्त मुझे भी पता नहीं था ।

मैं थोड़ी ही देर में अपनी  क्लास रूम  के नजदीक पहुंचने ही वाला था कि  मेरे पीछे से किसी लड़की की कोमल  आवाज  कानो में पड़ी, “हेल्लो”

यह प्यारी सी आवाज मेरे कानों को किसी मॉडर्न संगीत सा लगा। मैं पीछे मुड़कर देखा।

गुलाबी  समीज पर पीले रंग की मखमली दुपट्टा , आंखों में काजल,  होठों पर लाल रंग की लिपस्टिक लगायी बहुत ही खूबसूरत लड़की दिखी।

खिड़की से आती सूरज की किरणें उसके गालों से रिफ्लेक्स होकर सतरंगी इंद्रधनुष बना रहे थे। उसकी कातिलाना मुस्कान मेरे दिल बेध गई थी। मैं उसे देखकर कहीं खो सा गया था। मेरी सांसे थम सी गई थी तभी उसने दूसरी दफ़ा आवाज दी- “हेलो , मैं आप ही को बोल रही हूं”

इस बार उसने अपने हाथ को मेरे आंखों के सामने खिलाते हुए बोली थी। मैं ख़ुद को ख्बाव वाली दुनियां से बाहर निकाल कर लड़खड़ाते हुए बोला, “जी … जी बोलिए।”

 “रूम नंबर R014  कहां है ? प्लीज मेरी हेल्प कीजिये उसे ढूढने में।  एक्चुअली आज मेरा कॉलेज का पहला दिन है मुझे अपने क्लास रूम के बारे में कोई जानकारी नहीं हैं।” उस लड़की ने कोमल स्वर में बोली।

“आप यहां से सीधे जाकर राइट ले लीजियेगा। कुछ कदम चलने पर ही आपको अपनी क्लास रूम दिख जाएगी” मैंने उसे हाथ से इशारा करते हुए बोला।

मेरी बात सुनकर लड़की ने  हल्की मुस्कान के साथ थैंक्स बोली और फिर कमरे की तरफ चली गई । सच बोलूं तो मुझे भी उस कमरे के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी , कुछ देर पहले  जब मैं अपनी क्लास रूम ढूंढ रहा था उसी वक्त मैंने वह क्लास रूम देखा था।

उस लड़की को वहां से चले जाने के बाद भी मैं उसे कुछ समय तक देखता रहा। वह पीछे से भी देखने में उतना ही खूबसूरत लग रही थी जितना  की अभी आगे से देखने में मुझे लगी थी।

उस लड़की के जाने के बाद मैं भी अपने क्लास रुम के अंदर चला गया। क्लास रूम के अंदर बहुत सारे लड़के-लड़कियां थे। उन सभी लोगों के भी आज इस कॉलेज में पहला दिन ही थे । सबके आंखों में कुछ सपने थें ,कुछ सीखने की जज्बा और जिंदगी को खुलकर जीने की आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरी पड़ी थी।

 शायद सब लोगों को यही लग रहे होंगे की  कॉलेज पूरी करने के बाद जिंदगी संवर जाएगी और उनकी जिंदगी खूबसूरत हो जाएगी लेकिन इन भीड़ के बीच शायद मैं ही एक ऐसा था जिसे कॉलेज के पहले दिन ही जिंदगी मिल गई थी या यूं कहें की  जिंदगी सवर गई थी।

वह पीली दुपट्टे वाली लड़की मेरे दिल में घर कर गई थी। मैं उससे कभी मिला नहीं था और ना ही उसके बारे में कुछ जानता था। यहां तक की मैं उससे कुछ ज्यादा बातें भी नहीं कर पाया था। लेकिन जिस वक्त उसे पहली दफा देखा था। उसी वक्त मेरे दिल से एक आवाज आयी थी। यार ! यही तुम्हरी जिन्दगी हैं , तुम्हे इसके साथ ही जिंदगी बितानी है। हमेशा साथ रहेगी तुम्हारे हर कदम पर , जिन्दगी के हर मोड़ पर। मुझे लगा आज से यही मेरी रूह हैं और यही मेरी आशिकी।

खैर! कुछ समय के लिए इन बातों को भुला कर मैं  अपना ध्यान किताबों पर टिकाया । क्लास खत्म होने के बाद मैं फिर उसी जगह पर जाकर खड़ा हो गया जहां मुझे वह पीली दुपट्टे वाली लड़की मिली थी।

 मुझे उम्मीद था वह लड़की वापस यहीं से होकर गुजरेगी और मुझे देख कर एक बार फिर मुस्कुराएगी । लेकिन सभी विद्यार्थियों के कॉलेज से बाहर निकलने के बाद भी उसकी आने की कोई अता-पता ना चली।

जब उसे आने की कोई उम्मीद ना दिखी तब मैंने सोचा, “शायद मुझे क्लास से निकलने के पहले ही वह निकल चुकी होगी।”

मैं उदासीन चेहरा बनाकर कॉलेज से बाहर निकल गया। वैसे हम लड़कों को अक्सर यही होता है। कोई लड़की एक बार  मुस्कुराकर  बात किया कर लेती है, हम लडके उसे अपना दिल दे बैठते हैं और यही गलतफहमी  लोगों को हमेशा होती रहती है।

लेकिन शायद मेरे साथ ऐसा पहली बार हुआ था। मैं कुछ सोच ही रहा था कि वह पीली दुपट्टे वाली लड़की दिखी। वह किसी हठे-कठे लड़के के साथ बाइक पर बैठकर वहां से निकल रही थी। उसे किसी दूसरे लड़के के साथ बाइक पर बैठा देख मेरा कलेजा बैठ-सा गया। मेरी आंखें में मिचौलिया खाने लगा, मेरी आंखे औंध –सी गयी।

“साला एक लड़की भी पसंद आई जो किसी और की निकली।” मैंने खुद से बदबुदार कर बोला।

शाम को ठीक 6:00 बजे मैं घर पहुंच चुका था और अपने सोफे पर बैठकर 90’s (नाइनटीज ) के गाने सुन रहा था ।

 “तू प्यार है किसी और का, तुझे चाहता कोई और है ” Sony Max पर यह गाना आ रही थी।

 वैसे यह गाना उस वक्त  मुझ पर सूट नहीं कर रहा था । यह गाना खत्म होकर कोई अगला गाना आता की उससे पहले वहां पर मेरे बड़े भैया आ पहुचें । फ़िलहाल उस वक्त भैया पापा के कंपनी संभाल रहे थे और अगले हफ्ते ही इनकी शादी भी होने वाली थी।

“छोटे, आज कॉलेज का पहला दिन कैसा रहा ? ” भैया अपनी टाई को खोलते हुए बोले।

 “बस ठीक-ठाक” मैंने कहा।

“ ठीक-ठाक से क्या मतलब ! ” उन्होंने कंधे उचकाते हुए बोला।

“ भैया अभी कॉलेज में कोई दोस्त वगैरह नहीं ना है, इसलिए अभी ठीक-ठाक ही लगा शायद बाद में ठीक लगने लगे” मैंने कहा।

अब उन्हें कैसे बताऊं की कॉलेज के पहले दिन ही मुझे एक लड़की पसंद आ गई है और वह भी एक ऐसी लड़की जिसका बॉयफ्रेंड पहले से ही है।

Continue ……

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6 thoughts on “Teri-Meri Aashiqui। तेरी – मेरी आशिकी। Part – 01। हिंदी कहानी”

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